सोशल मीडिया..राजनीति में भविष्य तलाशते युवा !

 ऐसे हालात में कैसे बदलेंगे युवा भारत की तस्वीर- घर से बाहर कदम रखते ही आजाद पंछी की तरह खुले आसमान में विचरण करने की कल्पना में डूबी युवा पीढ़ी राजनीति करने वालों के हत्थे चढ़ने के साथ ही अपनी ऊर्जा सोशल मीडिया की लाइक कमेंट की दुनिया में गवा   रही है। उनको यह पता ही नहीं है कि हाथ से निकलता या वक्त फिर लौटकर आने वाला नहीं है। आज के हालात में हम देखें तो युवा वर्ग अपनी एनर्जी झूठी राजनीति और बहकावे की दुनिया में बेकार कर रहा है। महाविद्यालयों में पुनः प्रारंभ हुए छात्र संघ चुनाव केे जरिये आगामी विधानसभा, लोकसभा चुनाव में युवा उर्जा का उपयोग करने राजनीति की दुनिया के बड़े-बड़े  सब्ज बाग में युवाओं की मानसिकता को उलझाया जा रहा है।  जिससे युवा पीढ़ी अपने लक्ष्य से भटकती माता-पिता की उम्मीदों पर अनजाने में तुषारापात कर रही है। युवाओं के मनोविज्ञान का अधयन करके अंदाजा लगाया जा सकता है उनके अनुसार उन्हें राजनीति करनी है ? राजनीति में ही सब कुछ रखा है ?  उस को कब समझ आएगा कि उससे कितने लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं ? उसका परिवार उससे क्या चाहता है ? समाज उससे क्या चाहती है ? यह बातें उसके मन मस्तिष्क से कोसों दूर है। कारण क्या है ? यही कारण है कि भारत की युवा एनर्जी फिजूल, नॉनसेंस जैसे विषयों में खराब हो रही है। वर्तमान में ऐसा माहौल बनाया हुआ है की हर छोटे पद से लेकर बड़े पद तक हाहाकार मची हुई है । सोशल मीडिया की लाइक और कमेंट वाली आभाषी दुनिया है जो युवा वर्ग लीन है। आपकी फ्रेंड लिस्ट में जो फ्रेंड है वह आपकी फोटो या पोस्ट को ना पसंद करते हुए भी पसंद करते हैं। क्योंकि जब भी आप कोई अपनी पोस्ट डालें तो आपकी लाइक कमेंट बढ़ जाए। जब से यह दौर चला है सबसे युवा वर्ग गदगद में कि मेरे इतने फॉर लोअर है मेरे इतने फ्रेंड है। इतनी लाइक, इतनी कमेंट है। आचार डालोगे क्या इनका ? समझ नहीं आता,  क्या है ? क्या नहीं ? जहां तक अपना नजरिया है माजरा जो मैंने यह समझा है उसमें एक ही बात निकलकर सामने आती है फिजूल में सोशल मीडिया पर युवा वर्ग अपना समय बर्बाद कर रहा है। जितने भी सोशल यूजर है वह सही इसका नकारात्मक उपयोग करते हैं। वह अपने हिसाब से तो ठीक करते हैं। उनको जैसा लगता है, कुछ ऐसे हैं जो अपने विचार अपना कार्य लोगों को शिक्षा देने जागरुक करने कि दिशा मैं भी लगे हुए है। मैं उनसे प्रेरणा लेता हूं और जो इसका नेगेटिव उपयोग करते हैं उनको बिन मांगी सलाह भी देना चाहता हूं। कि आप अपने आप को समझे कि आप हैं क्या? फिर अपनी जिंदगी का फैसला करें कि आपको क्या करना है ? और क्या नहीं ?आपसे कितनी उम्मीद है कितनी अपेक्षाएं हैं देश को समाज को परिवार को दोस्तों को जितने लोग भी आप से जुड़े हुए हैं वह क्या चाहते हैं। इन सभी हालातों के बीच  युवाओं का एक बड़ा वर्ग  नशाखोरी की भेंट भी चढ़ता जा रहा है। उक्त हालात में  वह समझ ही नहीं पा रहा है कि भविष्य के लिहाज से वह क्या अच्छा कर रहा है और क्या बुरा कर रहा है। यह कटु सत्य है कि वर्तमान में देश का एक बड़ा तबका युवाओं की श्रेणी में आता है, परंतु इन युवकों का दुर्भाग्य कहें या देश की बदलती परिस्थितियों को दोषी मानें कि जिस प्रकार मोजूदा समय में देश में सेल्फ़ी और सोशल मीडिया का बोलबाला है, उसके कारण इन युवाओं को सही दिशा नहीं मिल रही है और यही कारण है कि इनकी यह दशा हो रही है।  इंक मीडिया छात्र भूपेंद्र राय की रिपोर्ट
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सतत पत्रकारिता का 27 वां वर्ष... 1990-2008 ब्यूरो चीफ दैनिक भास्कर भोपाल, 2009-2014 रिपोर्टर साधना न्यूज मप्र-छग, 2011-2015 रिपोर्टर न्यूज एक्सप्रेस, 2012-से ब्यूरो चीफ जनजन जागरण भोपाल, 2013-2016 ब्यूरो चीफ ओम टीवी न्यूज, 2017 से atalnews24.co [महत्वपूर्ण घटनाक्रम-फोटो-वीडियों 9425095990 पर तत्काल वाटसअप करें ]

5 Comments

  1. युवाओ को मार्गदर्शन देने वाला सटीक मनोभूमि पर खरा आर्टिकल।

  2. आने वाले समय मे राजनीति का भविष्य सोसल मीडिया ही तय करेगी ।

  3. यह बहुत ही सोचने समझने विचार करने योग्य बात है
    यह बहुत ही गंभीर इसतिथि है आज का युवा पीढ़ी दर दर भटक रहा है आज की युवा पीढ़ी को चिंतन करके ही कदम रखना होगा

  4. पनघट मे शीतला बिराजै , मरघट मे कै लाश !
    कन , कन , बडा देव बिराजै मन मै रख विसवास !!

    आज युवा युवकती औरत पुरूष बचा से लेकर सभी लगभग भटक गये है , भ – भुमी
    ग- गगन
    व- वायु
    अ- आगनी
    न- नीर
    भगवान
    सेवा सेवा

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