दिल्ली.. धन्य गुरु धन्य शिष्य.. सल्लेखना पूर्वक समाधिमरण.. 153 दिन में 133 उपवास

पूज्य गणाचार्य के सानिध्य में दो दिन में दो समाधि- दिल्ली। जैन दर्शन में नियम, संयम, उपवास संल्लेखना पूर्वक नश्वर देह का त्याग श्रवण को सिद्व शिला के करीब पहुंचा देता है। दिल्ली के जनकपुरी जिनालय में विराजमान पूज्य गणाचार्य के सानिध्य में दो दिन के अंतराल में दो मुनिराजों के समाधिमरण के बाद इन मुनिराजों के गृहस्थ जीवन के परिजनों के साथ ही मृत्यु महोत्सव में शामिल होने वाले श्रावकजन खुद को धन्य महसूस करते हुए धन्य गुरू धन्य शिष्य की चर्चा के साथ ऐसी ही चर्या के साथ जीवन के अंतिम समय में प्राण त्यागने के भाव जगाते नजर आ रहे है।  दमोह जिले के पथरिया में जन्मे गणाचार्य विरागसागर महाराज के सानिध्य में संघस्थ अनेक साधुओं को संलेखना व्रत को धारण करके समाधि को प्राप्त होने का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है। इसी कड़ी में पिछले दो दिनों में मुनिश्री 108 विश्वपूज्यसागर एवं  मुनिश्री मुनि विश्वस्त सागर के समाधिमण अवसर पर समारोह पूर्वक अंतिमयात्रा में शामिल होने का धर्मलाभ दिल्ली के श्रावकजनों को प्राप्त हुआ।  मुनि विश्वपूज्य सागर, सल्लेखनापूर्वक समाधिमरण पूज्य गुरुवर श्री 108 विरागसागर जी गुरुदेव के संघस्थ श्रमण मुनि श्री 108 विश्वपूज्यसागर जी काफी समय से पूज्य गुरुदेव के संघस्थ थे। वयोवृद्ध होने के बाद भी कठोरचर्या,अनुशासन, गुरु के प्रति समर्पण अद्भुत था। पूज्य गुरुदेव ससंघ के चरण सानिध्य में 12 दिसंबर को 9:02 बजे जैन मंदिर जनकपुरी दिल्ली में पूज्य श्री ने अपने नश्वर देह का त्याग किया। गुरचरणो में 80 साधुओं के सानिध्य में समता पूर्वक समाधि मरण को प्राप्त पूज्य विश्वपूज्य सागर जी 91 वर्ष की आयु थी। भीकमपुर ज़िला ललितपुर निवासी थे, 17 सितंबर 1999 सितंबर कीर्ति स्थंभ भिंड में मुनि दीक्षा प्राप्त की थी। 2010 से संलेखन व्रत चल रहा था, अंतिम साँस लेने से पहले 3 दिन से उपवास चल रहा था। मुनि श्री विश्वस्त सागर-153 दिन में 133 उपवास- गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी गुरुदेव के परम शिष्य युवा तपस्वी रत्न श्रमण मुनि श्री 108 विश्वस्त सागर जी महाराज की 13 दिसम्बर को दोपहर 12:00 बजे पुज्य आचार्य श्री के श्री मुख से णमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए जैन मंदिर C-2 A जनकपुरी पश्चिम दिल्ली में गुरचरणो में 80 साधुओं के सानिध्य में समता पूर्वक समाधि मरण हुआ।  पुज्य मुनि श्री विश्वस्त सागर का जीवन परिचय- पुज्य मुनिराज की मुनि दीक्षा 2006 में श्रवणबेलगोला जी कर्नाटक में हुई। धन्य हे एसे मुनिराज, श्रमण संस्कृति ने वर्तमान का एक और युवा तपस्वी रत्न जिन्होंने 153 दिनों में 133 उपवास कर अपनी पवित्र आत्मा को शिद्ध शिला के करीब पहुँचा दिया। मुनिश्री 108 विश्वपूज्यसागर एवं मुनिश्री विश्वस्त सागर जी के महान वीर चर्या की में अनुमोदना करता हूँ, अपने आप को धन्य मानता हूं कि जब 2015 में गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी गुरुदेव के साथ कुंडलपुर से दमोह आए थे।  तो मेरे घर ऐसे वीर साधु की आहार चर्या सानंद सम्पन्य हुई थी और धन्य हो गए मेरे हाथ जो ऐसे महा श्रमण के हाथों पर ग्रास रख सके।  नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु.. अनुमोदना कर्ता दमोह से अटलराजेंद्र जैन परिवार
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सतत पत्रकारिता का 27 वां वर्ष... 1990-2008 ब्यूरो चीफ दैनिक भास्कर भोपाल, 2009-2014 रिपोर्टर साधना न्यूज मप्र-छग, 2011-2015 रिपोर्टर न्यूज एक्सप्रेस, 2012-से ब्यूरो चीफ जनजन जागरण भोपाल, 2013-2016 ब्यूरो चीफ ओम टीवी न्यूज, 2017 से atalnews24.co [महत्वपूर्ण घटनाक्रम-फोटो-वीडियों 9425095990 पर तत्काल वाटसअप करें ]

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