सावधान.. सोशल मीडिया पर धारा 144 लागू.. !आपत्ति जनक पोस्ट पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही !

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दमोह जिले में आज से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी- सामाजिक सदभाव के संदेशों के जरिए आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सोशल मीडिया साईडों का उपयोग धीरे धीरे साम्प्रदायिक सदभाव को बिगाड़ने में किया जाने लगा है। ऐसे में मामलों में गलत पहल करने वालों को समझाईस देने के बजाए आपत्जिनक पोस्टों पर कमेंट तथा कापी पेस्ट किए जाने की प्रवत्ति सामाजिक सदभाव को प्रभावित करने लगी है। जिसके बाद जिला प्रशासन को पर्व त्योहार के मौके पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करने के आदेश जारी करना पड़े है। जिसका उलंधन्न करने वाले को कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। दमोह। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ.श्रीनिवास शर्मा ने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा-144 के अंतर्गत जन सामान्य के स्वास्थ्य के हित एवं लोक शांति को बनाये रखने जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमाक्षेत्र में किसी भी आपत्तिजनक अथवा उद्वेलित करने वाली फोटो चित्र, मैसेज करने पर, साम्प्रदायिक मैसेज एवं उनकी फारवडिंग, ट़विटर, फेसबुक, व्हाटअप इत्यादि सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिक मैसेज आदि करने से, पोस्ट पर कमेंट करने की गतिविधियों के संबंध में पुलिस अधीक्षक दमोह विवेक अग्रवाल के प्रतिवेदन पर दमोह जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश जन सामान्य के जानमाल की सुरक्षा तथा भविष्यम में लोकशांति भंग करने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है तथा इतना समय उपलब्ध नहीं है कि जन सामान्य व इससे संबंधित सभी पक्षों को उक्त सूचना की तामिली की जा सके। अतः यह आदेश दण्ड प्रक्रिया संहित 1973 की धारा 144 (2) कें अंतर्गत एक पक्षीय परित किया जाता है। आदेश से व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144(5) के अंतर्गत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। अत्यंत विशेष परिस्थितियों में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के संतुष्ट होने पर आवेदक को किसी भी लागू शर्तों से छूट दी जा सकेगी। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लघंन करेगा तो उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों के तहत अभियोजन किया जावेगा। यह आदेश आज 13 मार्च 2018 कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी न्यायालयीन मुद्रा से जारी किया गया। उक्त आदेश 14 मार्च 2018 से 13 जून 2018 तक प्रभावशील रहेगा तथा उक्त प्रभावशील अवधि में इस आदेश का उल्लंघंन धारा-188 भारतीय दण्ड विधान अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आवेगा। पुलिस अधीक्षक दमोह विवेक अग्रवाल के प्रतिवेदन द्वारा अवगत कराये अनुसार व अन्य 3 माध्यमों से ध्यान में लाया गया कि दमोह जिले में सोशल मीडिया जैसे व्हाटसअप, फेसबुक आदि के माध्यम से असामाजिक तत्वों के कई समूहों द्वारा सामाजिक तानेवाने को तोडने, दो समुदायों के मध्य संघर्ष वैमनस्यता की स्थिति निर्मित करने हेतु तरह-तरह के आपत्तिजनक संदेश एवं चित्रों व वीडियों एवं आडियों मैसेज का प्रसारण किया जा रहा है तथा प्रसारण के माध्यम से एक स्थान पर एकत्रित होने एवं एक समुदाय के विरूद्ध वातावरण निर्मित करने जैसे संदेशों का प्रसारण हो रहा है। इससे दमोह की सामुदायिक सद्भाव एवं शांति व्यवस्था के लिए प्रतिकूल स्थितियां निर्मित हो रही है। इसके अतिरिक्त धार्मिक भावनाओं को उभारने एवं साम्प्रदायिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक दमोह द्वारा अवगत कराये गये अनुसार व मीडिया आदि के माध्यम से यह तथ्य ध्यान में लाया गया कि पिछले दिनों एक आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के कारण धार्मिक वैमनस्यता एवं उससे उपजित अशांति के कारण गंभीर लोक व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हुई थी। कई बार विरूपित चित्र या आपत्तिजनक दृश्य व्हाटअप पर डालने से भी आमजन की भावनायें आहत होकर कई बार लोक व्य्वस्था को खतरा उत्पन्न् होने की स्थितियां निर्मित हुई है।  यहां यह उल्लेखनीय है कि आपत्तिजनक पोस्ट से उतनी वैमनस्यता का संचार नहीं होता है जितना कि उस पर आये कमेंट और क्रास कमेंटस के कारण होता है । इंटरनेट पर एक प्रकार ‘’ वैमनस्यता की अभिव्यक्ति ‘’ ऐसे पोस्ट के माध्यम से होती है जिस पर हर कोई बिना विचार किये एवं बिना किसी दायित्व् के द्वेषपूर्ण एवं अश्लील शब्दों का प्रयोग कर धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।  गत् दिनों के घटनाक्रम से स्पष्ट है कि फेसबुक पोस्ट एवं उस पर कमेंट, लाईक, व्हाटअप पर आपत्तिजनक साम्प्रदायिक मैसेज एवं उनकी फारवडिंग, टविटर पर साम्प्रंदायिक मैसेज आदि से लोक शांति भंग करने में रखते है । यह आचरण वर्तमान परिवेश में लोक व्यवस्था को भंग कर सकता है, इस आचरण से उपजी प्रतिक्रिया किसी व्यक्ति विशेष को अपराध कारित करने के लिए उद्दीप्ता (प्दबपजम) कर सकती है । इस प्रकार के आचरण तथा संभावित अवांछित परिणाम में निकटस्थो एवं प्रत्य्क्ष संबंध विहित होकर इनका उपयोग अतिवादी संगठनों द्वारा विच्छिन्नी य (क्पेतनचजपअम) गतिविधियों के लिए किया जा सकता है । इन समस्त कारणों से मानव जीवन व लोक सम्पत्ति की क्षति संभावित है। इस तरह की गतिविधियों से जन सामान्य के स्वास्थ्य व जानमाल को खतरा आसन्नं हो गया है तथा भविष्य में इन कारणों से लोकशांति भंग होने की प्रबल आशंकाएं व्याप्त हो रही है । अतएव इस प्रकार की असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाये जाने की तत्काल आवश्यकता प्रतीत हो रही है। अटल राजेन्द्र जैन की रिपोर्ट
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सतत पत्रकारिता का 27 वां वर्ष... 1990-2008 ब्यूरो चीफ दैनिक भास्कर भोपाल, 2009-2014 रिपोर्टर साधना न्यूज मप्र-छग, 2011-2015 रिपोर्टर न्यूज एक्सप्रेस, 2012-से ब्यूरो चीफ जनजन जागरण भोपाल, 2013-2016 ब्यूरो चीफ ओम टीवी न्यूज, 2017 से atalnews24.co [महत्वपूर्ण घटनाक्रम-फोटो-वीडियों 9425095990 पर तत्काल वाटसअप करें ]

2 Comments

  1. जन सामान्य के स्वास्थ्य के मद्देनजर ध्वनि विस्तारक यंत्रों एवं उच्च ध्वनिक हार्न पर रोक लगना चाहिए

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