वित्त मंत्री के क्षेत्र में हॉकी मप्र केंप में आई जूनियर खिलाड़ी भोजन को तरसी, दीनदयाल रसोई में जाकर मिटाई भूख

वहां बेटियां दिला रही गोल्ड और यहां ऐसी अपेक्षा- राष्ट्रमंडल खेलों में बेटियां देश के लिए सोने चांदी के पदक बटोरकर दुनिया में देश का नाम गौरान्वित कर रही हैं। दूसरी ओर प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। ऐसे में हाकी मप्र के चयन कैंप में यदि बेटियों को खाने पीने के लिए तरसना पड़े तथा मजबूरी मे 5 रु थाली के भोजन की तलास में यहां से वहां भटकना पड़े तो इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है ? दमोह। मप्र के वित्त एवं वाणिज्य कर मंत्री जयंत मलैया के गृह नगर दमोह में 5 से 7 अप्रैल तक हाकी मप्र द्वारा जूनियर बालिका सिलेक्शन कैंप का आयोजन JPB गर्ल्स स्कूल के हाकी फीडर सेंटर ग्राउंड पर किया गया। इस कैंप में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से 5 दर्जन से अधिक बालिकाएं प्रदेश टीम में अपनी जगह बनाने की दावेदारी करने पहुंची थी। ग्राउंड पर इन बालिकाओं के बैठने तक का कोई इंतजाम नहीं होने से धूल कंकड़ भरी एक पट्टी पर बैठकर जूनियर बालिकाएं अपनी बारी आने का इंतजार करने को मजबूर रही। ऊपर की तस्वीर में यह देखा जा सकता है। प्रदेश टीम में चयन हेतु दस्तक देने के लिए आई इन बालिकाओं के पीने के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम तक नहीं किया गया था। पानी के नाम पर ग्राउंड पर जयंत मलैया लिखे नीले रंग के टैंकर को खड़ा करा दिया गया था। पानी को ठंडा करने के लिए 2 मटकों को रखवाया गया था। इसकेे अलावा बाहर सेे आई बालिकाओंं के स्कूल केे कमरों में रुकने, ठहरने का इंतजाम था। इन सभी अव्यवस्थाओं के बीच इस तीन दिवसीय जूनियर बालिका चयन कैंप के दौरान बालिकाओं ने अपने हाकी कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश की जूनियर हॉकी टीम में जगह बनाने बेहतर प्रयास किये। जिससे करीब ढ़ाई दर्जन बालिकाओं को जबलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए चयनित किया गया। जबलपुर से 18 सदस्य टीम का चयन भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता के लिए किया जाएगा। हाकी मप्र चयन शिविर मे बेटिया भोजन को तरसी- जिला मुख्यालय पर करोड़ों की लागत से स्टेडियम ग्राउंड तथा कृत्रिम हाकी मैदान का निर्माण चलने के बावजूद मप्र हाकी जूनियर केंप में आई बालिकाओं के भोजन का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। पहले ही दिन से बालिकाओं के साथ आए कोच शहर में सस्ते भोजन को तलाशते रहे। प्रथम दिन वृद्ध आश्रम के सामने 10 रु में रिक्शा चालकों के भोजनालय के खाने से बालिकाओं भूख मिटाई। इसके बाद बालिकाओं के साथ आए कोच को 5 रु में दीनदयाल रसोई के संचालन की जानकारी लगी। जिस पर दूसरे दिन दोपहर 12 बजे 42 बालिका खिलाड़ीयो के भोजन हेतु 160 रु देकर भोजन पर्ची प्राप्त करके देर तक खिलाड़ी अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। तथा बाद में गरीबों के हिस्से का पांच रुपये थाली का भोजन करके हॉकी खिलाड़ियों ने दूसरे दिन की भूख मिटाई। इस मामले में जब हाकी संघ के सचिव ललित नायक से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण कैंप  एवं खिलाड़ियों के भोजन के लिए किसी प्रकार की सहायता या बजट शासन से प्राप्त नहीं होता। शिविर में आए खिलाड़ियों को स्वयं अपना इंतजाम करना पड़ता है। वही खिलाड़ियों के साथ दीनदयाल रसोई में भोजन कर रहे कोच का कहना था कि रुपए नहीं होने की वजह से सस्ते भोजन की होटल की तलाश की गई। इसे विडंबना ही कहा जाए कि जिन बालिकाओं में से मध्य प्रदेश की जूनियर हॉकी टीम की तलाश की जा रही है उन के भोजन के इंतजाम हेतु तक कैंप लगाने वाले गंभीर नजर नहीं आए। विभिन्न अवसरों पर इनके द्वारा प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया के नाम का उपयोग संरक्षक के तौर पर किया जाता रहा है। इस शिविर में खिलाड़ियों से परिचय लेने वालों में मंत्री पुत्र सिद्धार्थ मलैया से लेकर हॉकी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कांग्रेस नेता अजय टंडन के नाम अखबारों में छपते रहे हैं। ऐसे में सवाल यही उठता है कि केंप के आयोजक अपने संरक्षकों, मंत्री पुत्र आदि को या शहर के समाज सेवियों को जूनियर बालिका खिलाड़ियों के भोजन पानी में आर्थिक कठिनाइयों की जानकारी देकर व्यवस्था नहीं करा सकते थे ? या फिर अनेक प्रकार से कागजों में बजट खर्च करने वाले खेल एवं युवक कल्याण विभाग के संचालन कर्ताओं से मदद नहीं ली जा सकती थी ?  यह ऐसे सवाल है जिनका जवाब देने को तैयार नहीं है। इधर शिविर के अंतिम दिन रविवार को दीनदयाल रसोई बंद रहने से खिलाड़ी बालिकाओं को लँगड़ा होटल की तलाश में पतासाजी करते भटकना पड़ा। देश प्रदेश के एक प्रमुख अखबार में अव्यवस्थाओं की खबर लीड बनकर लगने के साथ सुर्खियों में रही। वही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आई खिलाड़ी बालिकाएं वित्त मंत्री के शहर से एक दुखद अनुभव लेकर अपने नगरों के लिए रवाना हुई। उनके मन में रानी दमयंती की नगरी दमोह के इंतजामों को लेकर जो छवि निर्मित हुई है उसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन आगामी कैंपों में खिलाड़ियों को इस तरह के हालातों का सामना नहीं करना पड़े इस और ध्यान दिए जाने के साथ ही व्यवस्थाएं सुनिश्चित किया जाना अति आवश्यक है। इसी मकसद से इस खबर को लिखने हमें मजबूर होना पड़ा है। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट
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3 Comments

  1. Sport child Desh ka bhavisya h en par gour karna jaroori h, esme ye kharch nahi karege shasan se nahi milta aur agar avi koi Rajniti ka kam aajaye to bina pooche karodo mita denge,Aapne bahut sahi likha aise hi jankri sarkari ki pol khol kar khud rakh rahi h

  2. श्रीमान अटल सर जी आपने बहुत अच्छा लिखा , आज मुझे खुशी हुई अपने पहल की हम लोग हमेशा से ही अपने पैसों से ही नेशनल ट्रायल देते आये हैं, आने जाने एवं खाने की व्यवस्था खिलाड़ी को ही करनी होती है , जब खिलाड़ी का नाम टीम में आ जाता है , तब हमें शासन की सुविधाओं का लाभ प्राप्त होता है ,
    अधिकतर खिलाड़ी गरीब घरों से ही होते हैं तो मज़बूरी बस सस्ता खाना खाने को मजबूर होते हैं , कोच या टीम मैनेजर 1 या 2 खिलाड़ियों को अपनी जेब से तो खिला सकता है लेकिन 20 या उससे अधिक खिलाड़ियों की मदद ना कर पाना उसकी भी मज़बूरी होती है ,आपसे अनुरोध है खिलाड़ियों के हक़ मैं हमेशा साथ रहें ,
    धन्यबाद श्रीमान अटल जी

  3. देख लो दमोह के हाल और ये वही लोग कर रहे है जो बेटी बचाओं बेटी बढाओं का नारा छाती फुला कर लगाते है और जब बेटियाे को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है तो उनके लिये कुछ भी नही कर सकते है बस हाथ मिलाना और फोटो खिचवाना आता है इनको
    कोई बात नही बैसे भी बेटियां किसी के अहसान की मुहताज नही होती है मेरी दुआ है सभी बेटिया बहुत उन्‍नति करें और अपनी प्रतीभा से इन जैसे लोगों का मुह बंद करें ताकि इनको भी पता चले की जब इनको संरक्षण देना था तब इन लोगों से क्‍या किया इनके लिये

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