दमोह में आचार्य श्री की ऐतिहासिक भव्य आगवानी, सागर नाके पर विद्यायतन विद्यापीठ का शिलान्यास

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प्रातः बेला में आचार्य श्री की अगवानी हेतु जनसैलाब- दमोह। संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज गुरुवार की प्रातः बेला में जब आम आदमी अपनी नींद से भी नहीं उठा था तब उनके दमोह नगर में मंगल प्रवेश की खबर लगते ही लोग जबलपुर नाके की तरफ भागते नजर आए। परंतु गुरुवर तब तक टोल नाके के नजदीक पहुंच चुके थे। गुरुवार की प्रातः बेला में जबलपुर रोड से आचार्य श्री के शहर की ओर बढ़ते कदम और इनकी अगवानी करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जनों की भीड़ शहर से करीब 10 किलोमीटर आगे तक पहुंच गई थी। टोल टैक्स नाका आने के पहले ही लोगों के बीच में उत्सुकता थी कि आचार्य श्री कहां पर रुकते हैं। मारुताल में भी आचार्य श्री के रोकने के लिए तथा आहार चर्या हेतु तैयारियां कर ली गई थी। टोल बैरियर को पार करते ही आचार्य श्री की मारुताल मैं  रुकने की संभावना जताई जा रही थी। परंतु मारुताल को भी को भी पीछे छोड़ते हुए आचार्य श्री आगे बढ़ गए। उसके बाद जबलपुर नाका जैन मंदिर क्षेत्र में आचार्य श्री की भव्य अगवानी के लिए खड़े सैकड़ों लोगों के अलावा यहां की जैन समाज को पूरी उम्मीद हो गई थी कि आचार्य श्री यहीं पर रुकेंगे। परंतु आचार्य श्री यहां से पॉलिटेक्निक कॉलेज क्षेत्र में शौच क्रिया के लिए चले गए उसके बाद लोगों का इंतजार शुरू हो गया कि आचार्य श्री किस तरफ कदम बढ़ाते हैं। एक तरफ महाराणा प्रताप चौक से घंटाघर के लिए पलक पावडे बिछा कर श्रद्धालु जनों द्वारा आचार्य्य श्री की अगवानी की तैयारियांं की गई थी। दूसरी ओर सागर  रोड पर भी आचार्य श्री की अगवानी के लिए इंतजार किया जा रहा था। आचार्य श्री के कदम जैसे ही बेला ताल मार्ग की ओर बढ़े यह तय हो गया कि आचार्यश्री घंटाघर होते हुए जैन धर्मशाला पहुंचेंगे। कीर्ति स्तंभ से गुरुजी ने फिर यू टर्न लिया और घंटाघर के बजाय शिवाजी स्कूल मार्ग पर मुड़ गए। जैन धर्मशाला तक आचार्य श्री की मंगल आगवानी करने के लिए सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जनों की नजरें उत्सुकता के साथ लगी हुई थी। आचार्य श्री की एक झलक पाने के लिए लोग पलक पावड़े बिछाकर इंतजार करते नजर आ रहे थे। वही आचार्यश्री अपने चिरपरिचित शैली में नजरें नीचे किए हुए श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर की ओर चरण बढ़ा रहे थे। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच आचार्य श्री संघ सहित नन्हे मंदिर जी पहुंचे। जहां भव्य अगवानी पाद प्रचालन के उपरांत आचार्य श्री ने मंदिर जी में प्रवेश कर मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए। उसके बाद मुनि संघ ने भी श्रीजी के दर्शन किए। जैन धर्मशाला में आचार्य श्री के प्रवचन हेतु की तैयारियां कर ली गई थी। परंतु आचार्य श्री ने अपने चिरपरिचित शैली में धर्मशाला के ऊपर से ही श्रद्धालुओं को दर्शन देते हुए संछिप्त प्रवचन के जरिए हजारों की भीड़ को संतुष्ट कर दिया। प्रवचन उपरांत श्रीजी के दर्शन कर आचार्य श्री एवं मुनि संघ आहार चर्या के लिए निकले। अनुमान के मुताबिक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को पड़गाहन करके अपने चौके में ले जाने तथा आहार दान करने का सौभाग्य ब्रह्मचारी स्वतंत्र भैया, परिजनों को प्राप्त हुआ। इस दौरान  बड़ी संख्या में श्रद्धालु जनों की भीड़ लगी रही। कुंडलपुर कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई, महामंत्री नवीन निराला एवं अन्य परिवारों को भी अलग-अलग मुनियों की आहार चर्या कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दोपहर में सामयिक के बाद आचार्य श्री का मंगल विहार घंटाघर, स्टेशन चौराहा, तीन गुल्ली होते हुए सागर नाका गांधी आश्रम की ओर हुआ। जहां पर विद्यायतन विद्या पीठ के निर्माण हेतु भूमि पूजन शिलान्यास कार्यक्रम गुरु जी के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। यहां पर ब्रह्मचारी सुनील भैया के निर्देशन में भूमि पूजन शिलान्यास संपन्न हुुुआ। आचार्य श्री की दिव्य देशना का लाभ हजारों श्रद्धालु जनों को मिला। इसके बाद मलैया मिल जैन मंदिर में दर्शन उपरांत ईमलाई  बायपास मार्ग  की ओर से आचार्य श्री के मंगल विहार हो गया गुरु जी का रात्रि विश्राम उमरी गांव मैं होगा। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट
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